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7वें वेतनमान को लेकर बनाई गई सामन्त कमेटी की रिपोर्ट के बाद भी कर्मचारियों हाथ खाली

जयपुर: सरकारी कर्मचारियों के लिए 7 वां वेतनमान लागू करने और उसकी विसंगति दूर करने के मकसद से बनाई गई सामन्त कमेटी की रिपोर्ट 2 माह पूर्व सौंपी जा चुकी है. कमेटी के कार्यकाल के दौरान कमेटी पर 9 लाख 36 हजार 15 रुपये खर्चा किया जा चुका है, लेकिन नतीजा सिफर है, क्योंकि कमेटी की सिफारिशें लागू करना तो दूर वेतन विसंगति दूर करने की उसकी सिफारिश उजागर भी नहीं कि गई हैं. खास रिपोर्ट:

सामन्त कमेटी की रिपोर्ट को लेकर आम सरकारी कर्मचारी ठगा सा महसूस कर रहा है. वजह है कि करीब ढाई साल की पूरी मशक्कत और लाखों रुपये खर्च करने के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तो सौंप दी है, लेकिन वेतन विसंगति से जुड़े वास्तविक फायदे को लेकर सरकारी कर्मचारी अभी भी खाली हाथ हैं।

जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा हुआ खर्च:
सामन्त कमेटी का कार्यकाल 2 वर्ष 5 माह 7 दिन रहा. इस दौरान कमेटी को लेकर पूरा खर्चा 89 लाख 36 हजार 15 रहा. सबसे पहले 23 फरवरी 2017 में सामंत कमेटी का गठन हुआ था. जिसका उद्देश्य था 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशों को राज्य के हिसाब से कैसे लागू किया जाए. 25 सितंबर 2017 को कमेटी ने रिपोर्ट दे दी थी. इसमें पूर्व सीएस डीसी सामन्त को अध्यक्ष बनाया था, जबकि लेखा सेवा के पूर्व सदस्य डी के मित्तल व एम पी दीक्षित को सदस्य बनाया गया था. 17 अक्टूबर 2017 को पूर्व राजे सरकार ने 7 वां वेतनमान लागू करने का तोहफा दिया, जिसकी विस्तृत अधिसूचनाएं 30 अक्टूबर 2017 को जारी की गईं. 3 नवंबर 2017 को वेतन विसंगति दूर करने और कर्मचारियों की समस्या का निदान करने के लिए कमेटी को काम सौंपा. 11 नवंबर 2017 को एरियर मामले में कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी थी. फिर कमेटी को वेतन कटौती का परीक्षण करके रिपोर्ट देने को कहा था.

19 जुलाई 2018 को कमेटी के कार्यक्षेत्र में वृद्धि की गई, जिसके तहत उसे विभागों व कर्मचारी संघों से चर्चा करने, पदों/संवर्गों के लिए उच्चतर वेतन/पे लेवल के ज्ञापनों को लेकर चर्चा करने और परीक्षण करके सिफारिश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. तब से करीब 7 बार इसका कार्यकाल बढाया जा चुका था. 31 जुलाई 2019 को कमेटी ने रिपोर्ट दी थी, तबसे अब तक 2 माह हो चुके और न तो सिफारिशें लागू हुईं और न ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया.

ऐसे हुआ पूरा:
—सामन्त कमेटी को लेकर पूरा खर्चा 89 लाख 36 हजार 15
—अध्यक्ष डीसी सामन्त को वेतन भुगतान 24 लाख 88 हजार
—दो सदस्यों का वेतन भुगतान 37 लाख 32 हजार
—सलाहकार को वेतन भुगतान 6 लाख 81 हजार 118
—सहायक लेखाधिकारी द्वितीय को भुगतान12 लाख 94 हजार 654
—कनिष्ठ सहायक को भुगतान 597998
—चतुर्थ श्रेणी संविदाकर्मी 142245
—सदस्यों का स्वागत खर्चा 34237
—समिति सदस्यों का TA,DA शून्य
—RTI में आई मिली खर्चे की एक्सक्लूसिव जानकारी

गहलोत सरकार से अब यह है उम्मीद:
माना जा रहा है कि 2400 ग्रेड पे की 3 और 2800 ग्रेड पे की 2 स्लैब एक करने का फॉर्मूला निकाला गया था, जिस पर अमल किया जा सकता है. इससे 5 वीं अनुसूची के तहत वेतन कटौती की भरपाई की सिफारिश हो सकती है. इससे एलडीसी, हेल्पर, बेलदार, चौकीदार, फिटर व अन्य प्रभावित कर्मियों के नुकसान की भरपाई हो सकती है. साथ ही अभी सेवा के 10,20,30 वर्ष पूरे करने पर गजेटेड अफसर को ग्रेड मिलती है. अब गजेटेड व नॉन गजेटेड को 33 या 34 वर्ष पर ग्रेड दी जा सकती है. राजे सरकार में ग्रामीण भत्ता देने को लेकर बात सामने आई थी, इस पर अमल हो सकता है. वैसे संविदाकर्मियों की समस्या पर सब कमेटी विचार कर रही है, लेकिन उनके मानदेय में वृद्धि हो सकती है. इसके साथ ही रोडवेज कर्मियों के लिए राहत दी जा सकती है. वहीं कनिष्ठ अभियंताओं को ग्रेड पे देने एमटीएस का प्रारंभिक वेतन बढाने,प्रयोगशाला सहायक को ग्रेड पे, लोकजिंबिष कर्मियों व एसएसए कर्मियों के समायोजन और फार्मासिस्टों के पदोन्नति संबंधी मसले पर सकारात्मक रुख की आशा है. 

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